भारत और अमेरिका के बीच ऐतिहासिक व्यापार समझौता हुआ है। जानें कैसे भारत द्वारा रूसी तेल बंद करने और डिजिटल टैक्स हटाने से अमेरिकी बाजार के रास्ते खुले और टैरिफ में कमी आई।
भारत और रूस के रिश्तों को लेकर चल रही अटकलों पर क्रेमलिन ने विराम लगाया है। दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि भारत की ओर से रूसी तेल खरीद रोकने का कोई संकेत नहीं मिला है। अमेरिका के साथ ट्रेड डील के बावजूद भारत–रूस ऊर्जा सहयोग यथावत रहने के संकेत मिले हैं।
दावोस में अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने भारत पर लगे 25% टैरिफ को हटाने के संकेत दिए हैं। जानें रूसी तेल विवाद, 500% ड्यूटी की धमकी और भारत की 'इंडिया फर्स्ट' ऊर्जा नीति पर इसका असर।
वर्ष 2026 की शुरुआत ने वैश्विक राजनीति को एक ऐसे मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है, जहाँ अमेरिका अपनी ऊर्जा और व्यापारिक नीतियों के माध्यम से नए वैश्विक मानकों को परिभाषित कर रहा है।
CREA रिपोर्ट के अनुसार, नवंबर में भारत का रूसी तेल आयात 2.6 अरब यूरो के साथ रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुँचा। चीन के बाद भारत दूसरा सबसे बड़ा खरीदार है। सरकारी रिफाइनरियों ने 22% वृद्धि दर्ज की, जबकि भारत रियायती रूसी तेल को रिफाइन कर पश्चिमी देशों को निर्यात कर रहा है।
भारत ने अमेरिका के व्यापार सलाहकार पीटर नवारो के रूस-भारत संबंधों पर दिए बयानों को गलत और भ्रामक बताया। विदेश मंत्रालय ने साफ किया कि भारत-अमेरिका के रिश्ते काफी मजबूत हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 31 अगस्त को SCO समिट में शामिल होने चीन जाएंगे। 2020 में गलवान झड़प के बाद यह उनकी पहली चीन यात्रा होगी। जानें दौरे का महत्व, जयशंकर की मुलाकात और ट्रंप की धमकियों का असर।



















